internet ka kaisa pyar – ऑनलाइन प्यार (4)

internet ka kaisa pyar – ऑनलाइन प्यार (4)

विवेक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ पढ रहा था. तभी उसका दोस्त धीरेसे, कोई आवाज ना हो इसका ध्यान रखते हूए, उसके पिछे आकर खडा हो गया. काफी समय तक जॉनी विवेकका क्या चल रहा है यह समझनेकी कोशीश करते रहा.

” क्या गुरु… कहां तक पहूंच गई है तुम्हारी प्रेम कहानी ? ” जॉनीने एकदमसे उसके कंधे झंझोरते हूए सवाल पुछा.

विवेक तो एकदम चौंक गया और हडबडाहटमें मॉनीटरपर दिख रही विंडोज मिनीमाईझ करने लगा.

जोरसे ठहाका लगाते हूए जॉनीने कहा , ” छुपाकर कोई फायदा नही … मै सबकुछ पढ चूका हूं ”.

विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छिपानेका प्रयास करते हूए फिरसे मॉनिटरपर सारी विंडोज मॅक्सीमाईज करते हूए बोला, ” देख तो .. उसने मेलके साथ क्या अटॅचमेंट भेजी है ”

” मतलब आग बराबर दोनो तरफ लगी हूई है …. वैसे उस चिडीयाका कुछ नाम तो होगा… जिसने हमारे विवेक का दिल उडाया है” जॉनीने पुछा.

” अंजली” विवेकका चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था. ( pyar )

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