dost ki maa bahen ko chodne ki ichchha – दोस्त की माँ और बहन को चोदने की मेरी इच्छा (8)

dost ki maa bahen ko chodne ki ichchha – दोस्त की माँ और बहन को चोदने की मेरी इच्छा (8)

इधर मेरा ‘सामान’ भी पैन्ट में खड़े-खड़े इठने लगा था.. मैंने भी
पारी बदलते हुए उसके मम्मों को हाथों में जकड़ते हुए उसके
सलवार के नाड़े की ओर नज़र दौड़ाई तो देखा की सलवार के
आगे का हिस्सा गीला हो चुका था।
मैंने माया के चेहरे की ओर आश्चर्य भरी निगाहों से देखा तो
माया ने पूछा- क्या हुआ मेरे नवाब.. ऐसे क्यों देख रहे हो?
तो मैंने उसकी सलवार की ओर देखते हुए उससे पूछा- क्या बात
है.. इस समय इतना पानी निकल रहा है.. कि तुम्हारी सलवार
के ऊपर से ही साफ़ झलक रहा है।
तो वो मुस्कुराते हुए बोली- जब मथानी इतने अच्छे से चलेगी
तो मक्खन तो निकलेगा ही..
मैंने बोला- आज सुबह भी तो मथा था.. तब तो ऐसा नहीं हुआ
था?dost ki maa bahen ko chodne ki ichchha
तो वो बोली- इस समय पैन्टी नहीं पहनी है और उस समय पैन्टी
पहन रखी थी।
मैंने बोला- हम्म्म.. क्या बात है माया रानी.. लगता है आज
रात का मेरे लिए तुमने पूरा मायाजाल बिछा रखा है।
तो वो हँसते हुए अपने हाथों से मेरे सर को पकड़कर अपने होंठों
से चुम्बन करते हुए बोलने लगी- अब मैं बस तुम्हारी हूँ.. तुम्हारे
लिए कुछ भी करुँगी.. तुमने मेरी बरसों पुरानी इच्छा को पूरा
किया है।
तभी उनका फोन पर घन्टी बजी.. जो कि विनोद का था।
मैंने माया को फोन दे दिया और माया फोन ऑन करके हाल
चाल लेने लगी।
उसने मेरे बारे में पूछा तो बोली- वो बाहर कमरे में टीवी देख
रहा है.. जबकि तब तक सीन बदल चुका था मैं माया की
सलवार उतार कर उसकी मखमली जांघों को सहला रहा था
और अपने मुख से उसके गोल और सुडौल उरोजों का रसपान कर
रहा था।
फिर मैंने धीरे से उनकी मखमली पाव सी चूत में ऊँगली घुसेड़
दी।

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