dost ki maa bahen ko chodne ki ichchha – दोस्त की माँ और बहन को चोदने की मेरी इच्छा (5)

धीरे-धीरे मालिश करने से लड़कियां काफी मस्त जाती हैं और
इससे चुदाई की आग भी बढ़ जाती है। यह आप चाहे कभी
अज़मा कर देख लेना।
उसको मालिश में इतना मज़ा आ रहा था कि पूछो ही मत..
वो किसी मादा अज़गर की तरह बस आँखें बंद किए हुए.. मेरे
कामुक स्पर्श का आनन्द ले रही थी।
फिर उसकी पीठ को चूमते हुए उसके कान में धीरे से बोला-
जरा घूम जाओ.. पीछे हो गया। तब जा कर उन्होंने आँख
खोली और मेरे गालों में पप्पी जड़ते हुए बोली- आज तक मैं ऐसे
प्यार के लिए तड़प रही थी.. जो मुझे तुमसे मिल रहा है.. आई
लव यू राहुल.. (dost ki maa)
यह कह कर वो पीठ के बल लेट गई..
फिर मैंने उनके चूचों पर तेल डाला और थोड़ा सा नाभि के
पास और थोड़ा हथेलियों में लेकर उनके चूचों की हलके हाथों
से मालिश शुरू कर दी..
जिससे उसके मुँह से एक सिसकारी निकली- आआआहह आह
आआअहह..
शायद वो मेरी मालिश से इतना कामातुर हो गई थी कि वो
झड़ने लगी..
जिसका एहसास उनके हाथ व पैरों की अकड़ी नसों और पैन्टी
के अगले हिस्से को देख कर लगाया जा सकता था..
लेकिन मैंने उन्हें यह एहसास नहीं होने दिया क्योंकि मैं उनके
अन्दर की आग और भड़काना चाहता था ताकि वो खुद
चिल्ला-चिल्ला कर भिखारी की तरह मुझसे लण्ड मांगें।
जब उसके शरीर की ऐंठन थोड़ी कम हुई तो उसने मेरे हाथों को
पकड़ कर चूम लिया और बुदबुदाते हुए कहने लगी- राहुल, तुम्हारे
हाथों में तो जादू है.. किसी को एक बार प्यार से छू लो तो
वो तुम्हारी दीवानी हो जाए।(dost ki maa)
तो मैंने उन्हें चूमते हुए बोला- मेरी जान.. अभी तो बस तुम्हारा
दीवाना बनने का दिल है.. तुम मुझे पहले दिन से ही बहुत पसंद
थीं। मैं इस घड़ी के लिए कब से बेकरार था।
यह कहते हुए मैं उसकी जांघ की तरफ गया और थोड़ा सा तेल
लेकर उसकी जांघों में मलने लगा.. जिससे उसका जोश दुगना
हो गया और वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।
‘अहा.. अम्मह… उम्माह… बस्स्स आहह..आहह.. ऐसे ही करते
रहो.. अच्छा लग रहा है।’
फिर मैंने उसकी पैन्टी को बगल से पकड़ कर नीचे खींच दिया
और उसकी फूली हुई चिकनी फ़ुद्दी को देख कर मन ही मन झूम
उठा।
क्या क़यामत ढा रही थी.. एक भी बाल न था जो कि शायद
आज ही मेरे लिए उसने साफ़ किए थे।
मैंने आव देखा न ताव और झट से उसके चिकने भाग को चूम
लिया जिससे माया किलकारी मार कर हँसने लगी।
मैंने बोला- हँसो मत..
ऐसे हसीन पल को मैं हाथ से नहीं जाने दे सकता था इसलिए
खुद को रोक नहीं पाया।
मैंने थोड़ा सा हाथों में तेल लिया और उसकी चूत की मालिश
चालू कर दी..
जिससे पहले ही काफी तेल निकल चुका था।
धीरे धीरे मैं उसकी आग भड़काने के लिए उसके चूत के दाने को
मसलने लगा.. जिसके परिणाम स्वरूप उसने आँखें बंद करके
बुदबुदाना चालू कर दिया.. जो काफी मादक था और
माहौल को रंगीन कर रहा था।
‘आआआईईस्स्सस्स.. और जोर से आअह्हह हाँ.. ऐसे ही
आआआह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है..’(dost ki maa)
वो एकदम से अकड़ कर फिर से झड़ गई उसके कामरस से मेरी
ऊँगलियाँ भी भीग गई थीं जो मैंने उसकी पैन्टी से साफ़ कीं
और फिर उसकी चूत को भी अच्छे से पौंछ कर साफ किया।
फिर वो जब शांत लेटी थी तो मैं ऊपर की ओर जाकर फिर से
उसके चूचों को चूसने लगा जिससे थोड़ी देर बाद वो भी साथ
देने लगी.. पर अब मेरी ‘आअह्ह्ह्ह’ निकलने की बारी थी जो
कि मुझे मालूम ही न था। फिर धीरे से उन्होंने अपना हाथ
बढ़ा कर मेरी वी-शेप चड्ढी को थोड़ा उठा कर किनारे से मेरे
लण्ड महाराज को बाहर निकाल लिया।
मेरा लौड़ा पहले से ही सांप की तरह फन काढ़े खड़ा था।
उसको देखते ही उनके चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और बड़े
प्यार के साथ वो मेरे लण्ड को मुठियाने लगी.. जिससे मुझे और
उन्हें अब दुगना मजा आने लगा था।
फिर हम 69 की अवस्था में आ गए और वो मेरे लण्ड को छोटे
बच्चों की तरह लॉलीपॉप समझ कर चूसने लगी और जीभ से
रगड़ने लगी।
जिससे मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और मैं भी उनकी चूत को
आइसक्रीम की तरह चूसने चाटने लगा।
जिससे दोनों चरमोत्कर्ष पर पहुँच गए और सारे कमरे में एक
प्रकार का संगीत सा बजने लगा।
‘आआह्ह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह…’
देखते ही देखते दोनों शांत हो गए.. माया को तो होश ही न
था क्योंकि वो तीन बार झड़ चुकी थी.. जबकि मैं अभी एक
ही बार झड़ा था।
बहुत से लोग समझते हैं कि लड़कियाँ देर से झड़ती हैं.. उनके लिए
यह सन्देश है.. वो देर से नहीं झड़ती हैं.. अगर वो किसी के साथ
आत्मबंधन में बंध कर सेक्स करती हैं, तो उन्हें चरमोत्कर्ष में पहुँचने
में समय नहीं लगता है।
मैं उनके बगल में जाकर लेट गया और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर
प्यार करने लगा।(dost ki maa)
जिससे वो भी अपने आप को रोक न पाई और मुझे चूमते हुए
बोलने लगी- राहुल आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. मैंने
इतना मज़ा पहले कभी भी न लिया था.. इस खेल में, पर तुम तो
पूरे खिलाड़ी निकले.. कहाँ थे अभी तक…
वो पागलों की तरह मुझे चूमने और काटने लगी।
फिर से चुम्बनों का दौर शुरू हो चला था जिससे हम दोनों ही
मज़े से एक-दूसरे का सहयोग कर रहे थे.. जैसे हम जन्मों से प्यासे
रहे हों।
अब मैंने भी समय को ध्यान में रखते हुए देर करना ठीक न समझा
क्योंकि मुझे अपने घर से निकले तीन घंटे से ऊपर हो गए थे।
मेरे मन में यह चिंता सता रही थी कि घर वाले फ़ोन कर रहे होंगे
जो स्विच ऑफ था..
पता नहीं वो कैसा महसूस कर रहे होंगे और मैं भी उन्हें फोन
नहीं कर सकता था..
आंटी के घर से भी नहीं और मेरा तो पहले ही टूट चुका था..
तो मैंने घटनाक्रम को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुम्बन करते हुए
उनके मम्मों को भी मसलना चालू किया और धीरे-धीरे उनका
और मेरा जोश दुगना होता चला गया।
पता नहीं कब हम दोनों के हाथ एक-दूसरे के जननांगों को
रगड़ने लगे..
जिससे एक बार फिर से ‘आह्ह ऊऊओह्ह ह्ह…’ का संगीत कमरे में
गूंजने लगा।
मेरा लौड़ा अपने पूर्ण आकार में आ चुका था और उसकी चूत से
भी प्रेम रस बहने लगा था।
तभी मैंने देर न करते हुए उनके ऊपर आ गया और उनके मम्मों को
रगड़ते और चुम्बन करते हुए अपने लण्ड को उनकी चूत पर रगड़ने
लगा..
जिससे माया का जोश और बढ़ गया।
अब वो जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लौड़े पर अपनी
चूत रगड़ने लगी और अब वो किसी भिखारिन की तरह
गिड़गिड़ाने लगी- राहुल अब और न तड़पा… डाल दे अन्दर.. और
मुझे अपना बना ले..
उसके कामरस से मेरा लौड़ा पूरी तरह भीग चुका था।
फिर मैंने उसकी टांगों को उठाकर अपने कन्धों पर रख लीं,
जिससे उसकी चूत का मुहाना ऊपर को उठ गया।
फिर अपने लौड़े से उसकी चूत पर दो बार थाप मारी.. जिससे
उसके पूरे जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।
एक जोर से ‘आअह्ह्ह्ह्ह’ निकालते हुए वो मुझसे बोली- और
कितना तड़पाएगा अपनी माया को.. डाल दे जल्दी से
अन्दर..
तो मैंने भी बोला- माया का मायाजाल ही इतना अद्भुत है
कि इससे निकलने का दिल ही नहीं करता।
मैंने उसके कानों पर एक हल्की सी कट्टू कर ली।
फिर मैंने उसकी चूत के मुहाने पर लौड़े को सैट करके हल्का सा
धक्का दिया.. तो लण्ड ऊपर की तरफ फिसल गया।
शायद अधिक चिकनाई के कारण या फिर वो काफी दिन
बाद चुद रही थी इसलिए..(dost ki maa)
फिर मैंने उसके मम्मों को पकड़ते हुए बोला- माया जरा मेरी
मदद तो करो।
तो उसने मेरे लौड़े को फिर से अपनी चूत पर सैट किया और अपने
हाथों से चूत के छेद पर दबाव देने लगी।
अब मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझते हुए एक जोरदार
धक्का दिया जिससे मेरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई में
करीब 2 इंच अन्दर जाकर सैट हो गया।
इस धक्के के साथ ही माया के मुँह से एक दर्द भरी आवाज़
निकल पड़ी- आअह्ह्ह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह ह्ह्हह्ह…
उसके चेहरे पर दर्द के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे..
तो मैंने उसके पैरों को कन्धों से उतार कर अपने दोनों ओर फैला
दिए और झुक कर उसे चुम्बन करते हुए पूछने लगा- क्या हुआ जान..
तुम कहो तो मैं निकाल लेता हूँ.. हम फिर कभी कर लेंगे..
तो माया ने धीरे से अपनी आँखों को खोलते हुए प्यार भरी
आवाज़ रुआंसे भाव लेकर मुझसे बोली- काश तुम्हारे जैसा मेरा
पति होता.. जो मुझे इतना प्यार देता.. मेरी इज्जत करता..
मेरे दर्द को अपना दर्द समझता.. पर आजकल ऐसा नसीब वाले
को ही मिलता है।
फिर मैंने अपनी बात दोहराई- चुदाई हम बाद में कर सकते हैं..
अभी तुमको दर्द हो रहा है.. मुझे क्या मालूम कि इस दर्द के
बाद ही असली मज़ा आता है..
तो उन्होंने हँसते हुए बोला- अरे मेरे भोले राजा.. जब काफी
दिनों बाद या पहली बार कोई लड़की या औरत लौड़ा
अपनी चूत में लेती है.. तो उसे दर्द ही होता है.. फिर थोड़ी देर
बाद यही दर्द मीठे मज़े में बदल जाता है और जिसकी चूत का
पहली बार उदघाटन होता है.. उसको तो खून भी निकलता
है.. किसी को ज्यादा या किसी को कम और एक बात और
कभी कभी किसी के नहीं भी बहता है.. पर दर्द खून बहाने
वाली लड़कियों की तरह ही होता है।
मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मैं इस मामले में अनाड़ी जो था कि
‘एक्सपीरिएंस होल्डर’ के साथ चुदाई करने पर चलो कुछ तो
ज्ञान प्राप्त हुआ..(dost ki maa)

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